केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) में हाल ही में लागू किए गए नए कानून के बाद डीआईजी (DIG) स्तर पर आईपीएस अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कैडर अधिकारियों का कहना है कि इससे उनके पदोन्नति (प्रमोशन) के अवसर सीमित हो जाएंगे। वहीं, पूर्व अधिकारियों ने इस बदलाव को Supreme Court of India के पूर्व आदेशों के विपरीत बताते हुए इसे चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ कानून
सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026’ को राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने 9 अप्रैल को मंजूरी दी, जिसके बाद यह कानून लागू हो गया। कानून लागू होते ही अगले दिन दो आईपीएस अधिकारियों को डीआईजी पद पर प्रतिनियुक्ति (deputation) पर नियुक्त कर दिया गया।
डीआईजी स्तर पर नियमों को लेकर भ्रम
नए कानून में डीआईजी स्तर पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के लिए किसी आरक्षण का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद हालिया नियुक्तियों ने कैडर अधिकारियों को हैरान कर दिया है। उनका कहना है कि इससे उनकी कैरियर ग्रोथ प्रभावित होगी।
पहले की व्यवस्था के अनुसार:
- डीआईजी स्तर पर 20% पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित थे
- आईजी स्तर पर 50%
- एडीजी स्तर पर 67%
- डीजी स्तर पर 100% प्रतिनियुक्ति
लेकिन नए कानून में डीआईजी स्तर पर यह आरक्षण समाप्त कर दिया गया है।
हाल की प्रमुख नियुक्तियां
- आदर्श सिद्धू (IPS, राजस्थान कैडर) को BSF में DIG नियुक्त किया गया
- दीपक बर्नवाल (IPS, बिहार कैडर) को SSB में DIG बनाया गया
इन नियुक्तियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब कानून में स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तो ये नियुक्तियां किस आधार पर की गईं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
मई 2025 में Supreme Court of India ने CAPF के करीब 13,000 कैडर अधिकारियों को “Organized Group A Service (OGAS)” का दर्जा देने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि:
- IG स्तर तक IPS प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम किया जाए
- कैडर अधिकारियों को उच्च पदों तक पहुंचने का अवसर दिया जाए
- 6 महीने के भीतर कैडर रिव्यू किया जाए
हालांकि, कैडर अधिकारियों का आरोप है कि नया कानून इन निर्देशों की भावना के विपरीत है।
प्रमोशन को लेकर बढ़ी चिंता
कैडर अधिकारियों का कहना है कि:
- 15–16 साल में पहली पदोन्नति मिल रही है
- कैडर रिव्यू 2016 से लंबित है
- ऐसे में अधिकांश अधिकारी कमांडेंट बनकर ही रिटायर हो सकते हैं
पूर्व एडीजी एस.के. सूद के अनुसार, यह कानून कैडर अधिकारियों के हितों को कमजोर करता है और उनके करियर को प्रभावित करेगा।
फिर पहुंचेगा मामला सुप्रीम कोर्ट
पूर्व अधिकारियों ने इस कानून को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है। उनका तर्क है कि:
- यह कानून किसी कानूनी खामी को दूर नहीं करता
- बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अप्रत्यक्ष रूप से पलटता है
उन्होंने भरोसा जताया है कि उन्हें न्यायपालिका से फिर राहत मिलेगी।